મુક્તક/ मुक्तक

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રૂદન ની લઇ લો મજા, દિલાસો નહિ મળે,
સુંઘી લ્યો બાગના ફૂલો, સુવાસો નહિ મળે,
પોતે જ શોધ્યો જે પથ એ છે બહુ કાંટાળો,
મઝેદાર સુવાળા હવે એ પ્રવાસો નહિ મળે,
નીશીત જોશી 11.05.13

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મુક્તક/ मुक्तक

तुटके भी फुल खुद फितरत नही छोडता,
इत्र बन कर, जमाने में महकने लगता है ॥
हमे तो इश्क करने का भी हक नही ‘नीर’,
सुन कर हमे, आसमां भी बरसने लगता है ॥
नीशीत जोशी ‘नीर’ 15.03.12

મુક્તક/ मुक्तक

बेबसी बयां कर के क्यों सता रहे हो ?
ईजहार-ए-मोहब्बत क्या जता रहे हो ?
गुजर दी इन्तजार में हिज्र कि रात भी,
अब खयालो में ‘नीर’ क्या बता रहे हो ?

नीशीत जोशी ‘नीर’

મુક્તક/ मुक्तक

एक नजर ही काफी है कमाल के लिये,
गीरफ्त हो जाये दिल मीसाल के लिये,
सुबहशाम फिर जीक्र उसीका रहे लब पे,
खुद ही फिर वजह बने इस बेहाल के लिये….

नीशीत जोशी 26.12.11