क्या करे कोई !

17951615_1270057699730116_5876289047246442894_n

221-2121-1221-212
अब क्या किसी के इश्क का दावा करे कोई,
करता नही है कोई कि चर्चा करे कोई !

क्या जुर्म है ये इश्क?करो सात जन्म तक,
चाहे सता सता के भी रूठा करे कोई!

आँधी से भी चराग बुझाये न अब बुझे,
फिर महफिलो में क्यों सर नीचा करे कोई !

हर वस्ल बाद हिज्र का होना तो तय है तब,
फिर वस्ल का भी क्यों तो ये वादा करे कोई !

जिन्दा रखे है घाव, दिखाए किसे किसे,
बँधे तबीब के हाथ यहाँ, क्या करे कोई !

नीशीत जोशी

Advertisements

इश्क में कुछ तो अलामत ही सही

17883660_1262406263828593_816865454374089364_n

इश्क में कुछ तो अलामत ही सही,
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही !

हो तुझे परहेज़ गर फिर झूठ से,
गुफ्तगू में तब सदाकत ही सही !

आ नहीं सकते वो अब जब वस्ल पर,
दरमियाँ है ग़म,फलाकत ही सही !

खुश रहे नाराज हो कर हम बहुत,
कुछ हमारी ये अलालत ही सही !

बज़्म में खामोश हैं ये सोच कर,
कुछ तसव्वुर में बगावत ही सही !

शायरी की साहिरी तुम सीख लो अब,
महफिलों में फिर वो दावत ही सही !

है तलातुम इस जहन में क्या करें,
हिज्र का दिल में दलालत ही सही !

नीशीत जोशी
(अलामत-sign,अदावत-hatred, सदाकत- true,फलाकत-misfortune,अलालत-sickness, साहिरी-जादूगरी, दलालत-proof)

और क्या क्या ?

17757666_1251536174915602_3160895746139189798_n

प्यार यादें फिर वफा है और क्या क्या ?
शाम की ये सब दवा है और क्या क्या ?

राज़ तो है इस सुखन के कुछ मेरे भी,
उसमें वादे है जफ़ा है और क्या क्या ?

अश्क बहते है यहाँ आँखो से फिर अब,
ये जिगर भी सह रहा है और क्या क्या?

गुल के ही मानिंद तो सीखा था जीना,
ये अदा है या खता है और क्या क्या ?

अब नहीं कोई किसी का है यहाँ पर,
बस बची ये तेरी दुआ है और क्या क्या ?

कारवाँ तो बन गया था उस सफर में,
अपनी मंजिल लापता है और क्या क्या ?

तीरगी में ही कटी जब ‘नीर’ हर शब,
ख्वाब भी तेरा खफा है और क्या क्या ?

नीशीत जोशी ‘नीर’

दौर-ए-हाजिर की ये कहानी है!

17629881_1246770965392123_981689513050396285_n

क्या यही इश्क की निशानी है,
हुस्न उस में है और जवानी है!

है मुहब्बत में अब हवस दाखिल,
दौर-ए-हाजिर की ये कहानी है!

इश्क में नाम उसका भी है आज,
जिसने सहरा की खाक छानी है!

सच बताने की है कहाँ हिम्मत,
हार को जीत अब बतानी है!

देखकर ज़ुल्म दिल नहीं रोता,
आजकल खून भी तो पानी है!

कुछ तो ऐसे हैं जो खिजाँ में भी,
कहते फिरते हैं रुत सुहानी है!

जिंदगी में खुशी है ग़म भी ‘नीर’,
ये कहावत बहुत पुरानी है !

नीशीत जोशी ‘नीर’

दर्द के कोई बहाने यूँ न होते !

17523647_1244206198981933_890308552027649751_n

2122-2122-2122

तेरी दुन्या के दिवाने यूँ न होते,
महफिलों में वो तराने यूँ न होते !

ये तमाशा भी न होता प्यार का तब,
बाद मरने फिर शयाने यूँ न होते !

प्यार से तो बेखबर था मैैं उन्हीके,
जानते गर मुझ पे ताने यूँ न होते !

दीद से मिलती खुशी मुझको अगरचे,
दिलशिकस्ता के ये माने यूँ न होते !

बात हो जाती मेरी तुझसे उसी दिन,
दर्द के कोई बहाने यूँ न होते !

नीशीत जोशी

जिंदगी पल पल हँसाती ही रही

17352106_1240535656015654_5951207900813370930_n

2122-2122-212

जिंदगी पल पल हँसाती ही रही,
प्यार में जीना सिखाती ही रही !

मौत आती है बिना दस्तक दिये,
सोच उसकी पर डराती ही रही !

खोजते ही रह गये हम शाद पल,
याद आ कर फिर सताती ही रही !

मेरी तन्हाई बदौलत है तेरे,
शाम डर से मूँह छिपाती ही रही !

वो कभी तो प्यार कर लेगा मुझे,
इल्तज़ा दिल को लुभाती ही रही !

भूलना आसाँ नहीं होता कभी,
बात वो यादें दिलाती ही रही !

महफिलों में ‘नीर’ का अब क्या रहा,
वो ग़ज़ल सब कुछ बताती ही रही !

नीशीत जोशी ‘नीर’

हिज्र के ग़म को बढ़ा कर वो गए !

17265231_1237210626348157_1666611175243896520_n

२१२२ २१२२ २१२

वो कभी तन्हा सफर में खो गए,
कैद फिर मेरे तसव्वुर हो गये !

तोडकर दिल फिर सुकूँ उनको मिला,
देख सादाँ हम उसे खुश हो गए !

वस्ल की उम्मीद उसने छोड़ दी,
हिज्र के ग़म को बढ़ा कर वो गए !

शाम तन्हा रात भी खामोश थी,
ख्वाब ने ओढा फलक फिर सो गए !

मुद्दतो से वो रहे खामोश पर,
गुफ्तगू को *बेबहा लब हो गए ! *बहुमूल्य

नीशीत जोशी