है ये दर्दे जफ़ा कई दिन से

19437292_1335029083232977_6835212943724566303_n

2122-1212-22

है ये दर्दे जफ़ा कई दिन से,
मिल रही है सजा कई दिन से !

वस्ल का तो किया था वादा पर,
मुन्तज़िर ही रखा कई दिन से !

अब कहाँ मंजिलो को ढूँढूँ मैं,
रास्ता खो गया कई दिन से !

प्यार में लाजिमन मेरे थे वोह,
फिर भी डरता रहा कई दिन से !

घाव जो जो दिए है दिलबर ने,
बन गये लादवा कई दिन से !

लादवा ज़ख़्म,और दिल ग़मगीन,
जी नहीं लग रहा कई दिन से !

जिंदगी प्यार बिन नहीं कुछ भी,
शोर फिर क्यों मचा कई दिन से !

नीशीत जोशी ‘नीर’
(जफ़ा- सितम,लाजिमन- निश्चित रूप से,लादवा- नाइलाज)

Advertisements

પ્રતિસાદ આપો

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / બદલો )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / બદલો )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / બદલો )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / બદલો )

Connecting to %s