अंधेरो को मिटा कर देखते है

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अंधेरो को मिटा कर देखते है,
चरागो को जला कर देखते है,

मुकम्मल हो सफर कोई तो अब भी,
कदम अपने बढा कर देखते है,

मुहब्बत में संभलते होंगे ही वो,
उसीको आजमा कर देखते है,

गिरे को भी उठाना फर्ज़ है तो,
किसीको अब उठा कर देखते है,

किताबों की जरूरत है किसे अब,
चलो दिल को पढा कर देखतें है,

बुतो को जब खुदा माना यहाँ तो,
खुदा तुम को बना कर देखते है,

चलो अब ‘नीर’ रूठे को मना कर,
दिलों से दिल मिला कर देखते है !

नीशीत जोशी ‘नीर’ 27.08.16

સૌ મિત્રો ને જન્માષ્ટમીની હાર્દિક શુભેચ્છા….

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સૌ મિત્રો ને જન્માષ્ટમીની હાર્દિક શુભેચ્છા….
જય શ્રી કૃષ્ણ….

વરસો આજ વરસાદ બની,
કાન્હાનો જન્મદિન છે વળી,

ખાવ ખવડાવો મિસરી હજી,
કાન્હાનો જન્મદિન છે વળી,

રમો રાસ આનંદવિભોર થઇ,
કાન્હાનો જન્મદિન છે વળી,

સર્વસ્વ ગોકુળમથુરા સમજી,
કાન્હાનો જન્મદિન છે વળી,

મનડાને વનરાવન બનવી,
કાન્હાનો જન્મદિન છે વળી,

તરબોળ થઇ પ્રેમ સૌને વહેંચી,
કાન્હાનો જન્મદિન છે વળી,

લાલાનો કરો જય ઘોષ વળી,
કાન્હાનો જન્મદિન છે વળી.

નીશીત જોશી

દિવસ આવશે જરૂર

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લાગલાલા લાગલાલા ગલાગલા

રાત જાશે ને, દિવસ આવશે જરૂર,
દુ:ખ લૈ ને, સુખ પછી લાવશે જરૂર,

કોણ કોના મારફત, સોપાન બાંધશે,
સાથ એ ભગવાન પણ, આપશે જરૂર,

કેમ લાગે રાત, અંધારપટ હવે,
દીપ કોઈ પ્રગટાવી, જશે જરૂર,

લાગશે હેરાન થૈ જાશું, એમ તો,
આવશે એ, સારું ત્યાં લાગશે જરૂર,

જોજનો છો’ દૂર લાગે, પરંતુ છે,
રાખજો વિશ્વાસ, એ આવશે જરૂર.

નિશીથ જોશી 23.08.16

यहां हैं औरतेँ हयबत

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खबर नासाद, मुद्दत से कहाँ कोई बिशारत है,
यहां हैं औरतेँ हयबत, कहाँ कोई हिफाजत है,

न कोई वास्ता अब है, मुहब्बत से किसी को भी,
दिलो में सिर्फ है नफरत, रखी मुंह में शिकायत है,

मुहाली इस कदर छाई, कि मुश्किल हो गया जीना,
है महँगाई भी जोरों पे, क़यामत की ये दावत है,

कहीं डाका पड़ा है तो, कहीं इज़्ज़त हुई रुसवा,
कि अब अखबार भी तो, बस पढ़ाता ये हिकायत है,

अगर है आसमाँ को, कुछ घमण्ड अपनी अना पे तो,
हमें भी आसमानों को, जमीं करने की आदत है !

नीशीत जोशी
(बिशारत=good news, हयबत=panic, हिकायत=story, अना=ego)
घमण्ड अपनी (घमण्डपनी)         21.08.16

तुझे ही जमाने में, अपना देखा

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तुझे ही जमाने में, अपना देखा,
तेरा सिर्फ अपनो में, सपना देखा,

तेरे ही करिश्मे, अभी बरकरार है,
समंदर में सँगो का, बहना देखा,

कई हो गये, जन्म से ही अनाथ,
बिना माँ के, बच्चो का पलना देखा,

हवा गर चले, आ भी जाए तूफाँ,
चिरागो का ऐसे में, जलना देखा,

वो जीना, वो मरना, सभी तू जाने,
तेरे नाम में ही, वो बसना देखा !

नीशीत जोशी     18.08.16

कहाँ कहाँ

 

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उनकी पुकार को लिए, निकला कहाँ कहाँ,
कहने खुदा उसे फिर, अटका कहाँ कहाँ,

यादें रही तेरी, वह दिल में उतार दी,
मैं तेरी आरजू लिए, भटका कहाँ कहाँ,

कम तो नहीं हुई, बहते अश्क की सजा,
मैं रोकने उसे, फिर छुपता कहाँ कहाँ,

जीने नहीं दिया, मरने भी नहीं दिया,
ले कर वो झख्म मैं, अब फिरता कहाँ कहाँ,

फुर्कत कभी तो, वस्ल कभी है मेरी यहाँ,
ये हादसे के दर्द को, भरता कहाँ कहाँ !

नीशीत जोशी    13.08.16

दिल की बस्ती अजीब बस्ती है

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दिल की बस्ती अजीब बस्ती है,
क्यो मगर इस तरह वो जलती है !

आजमाईश कर नहीं दिल की,
रूह मेरी बेहिसाब डरती है !

मंझिलें दूर जब लगे मुझको,
जाँफिशानी उडान भरती है !

दाम देना पडा मुझे दिल का ,
बेइमानी खराब लगती है !

ख्वाब आते रहे तेरे शब भर,
वो सुबा फिर मुझे सताती है !

नीशीत जोशी    07.08.16