प्यार में अक्सर इंतजार करना होगा

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प्यार में अक्सर इंतजार करना होगा,
जिंदा रहने को कतरो में मरना होगा,

खो न जाए कहीं वो दुनिया की भीड में,
हर नग्मे को नामे इश्क़ पढना होगा,

नींद आती नहीं है मुहब्बत में रातभर,
ख्वाबो को भी इंतजार सहना होगा,

जानता नहीं जमाना दर्द का फसाना,
छुपा के ग़म को सामने हंसना होगा,

प्यार में कोई बनवायेगा ताज़महल,
जहाँ को तौफा संभाले रखना होगा,

सिर्फ मुस्कुराने से महक उठे फिज़ा,
उदासी में आबेचश्म से सजना होगा,

बहुत कठिन राह है मुहब्बत की ‘नीर’,
राहे इश्क़ में चलते ही जलना होगा !

नीशीत जोशी ‘नीर’    26.03.16

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Happy Holi

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जोगीरा स…र..र….र….र…
जोगीरा स…र…र….र….र…

उंची उंची दिवारें, छोटे सब के काम,
लोग नहीं घरों में,बसते है सिर्फ नाम,
जोगीरा स…र..र…र….र…

हौड लगी है दौड की,तू पैसे पीछे दौड,
बोलने दे जो बोले,तू अच्छे बुरे की छोड,
जोगीरा स…र..र….र….र…

बनना है जो नेता तुम्हे,करो देश बदनाम,
मीडीया,पेेपर,दौडेंगे पीछे,फिर पाओ अंजाम,
जोगीरा स…र..र….र….र…

लडका लडका सब कहे,लडकी मांगे न कोई,
उपरवाला जो दे लडकी, बहु ने जिंदगी खोई,
जोगीरा स…र..र….र….र…

राग, द्वेष, ईर्ष्या को ले के, करो दहन इस होली में,
भरभर बाँटों प्यार मुहब्बत, भरो खुद की झोली में,
जोगीरा स…र..र….र….र…

नीशीत जोशी     22.03.16

सुना होगा

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कुछ हमने सुना तो कुछ तुमने सुना होगा,
महफिल में चला जिक्र सबने सुना होगा,

कुछ दिल ने कही होगी रुसवाई अपनी,
जिसका टूटा था दिल उसने सुना होगा,

चुप रहना शायद अच्छा ही होता हमारा,
निकले होंगे अश्क, दर्द जिसने सुना होगा,

दर्द उभरे होंगे नासूर झख्मो से बेहिसाब,
कह देना रोना उसका,किसने सुना होगा,

रोते हुए भी, दिल ने मुस्कुराने को कहा,
तडपना उसका सिर्फ हमने सुना होगा !!

नीशीत जोशी    17.03.16

कब्रको ही आखरी ठिकाना बनाते है

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जी लिया बहुत,मौत को बुलाते है,

वो डराये सबको हम उसे डराते है,

 

मेरा मुन्तजीर है शहर-ए-खामोशा,

चलो हम खुद की कब्र खुदवाते है,

 

मिट्टी का बदन मिट्टी में मिलेगा,

उस मिट्टी से बदन को नहलाते है,

 

आदमी आम हो या हो वो सिकंदर,

कब्रको ही आखरी ठिकाना बनाते है,

 

हकीकत से मूँह फेर के रोना क्यों,

हश्र होना है सबका ये समझाते है !

 

नीशीत जोशी     12.03.16

टकराने दे आँखों से आँखें

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आहिस्ता आहिस्ता दर्द कम हो जाएगा,
प्यार के मल्हम से, ज़ख्म नरम हो जाएगा,

भूलना चाह कर भी, भूल न पाओगे हमें,
आँखो के साथ लम्हा भी नम हो जाएगा,

आएगी जब याद, पी कर हो जाएगे मदहोश,
जाम हाथों में होगा,खून गरम हो जाएगा,

आग पानी में भी लगा सकते है, आजमा लेना,
जान ले लेगी मुहब्बत, ये भरम हो जाएगा,

हो गया होगा चाँद भी उदास, चाँदनी के बगैर,
साथ होगा मुहिब्ब, तो दूर ग़म हो जाएगा,

टकराने दे आँखों से आँखें’, जाम की तरह,
पिघलेगा दिल और ‘नीर’ सनम हो जाएगा !

नीशीत जोशी ‘नीर’    10.03.16