प्यार अजब का फ़साना हैं

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यह प्यार भी अजब का फ़साना हैं,
चलने को ये रास्ता पूरा अंजाना हैं,

अजब कि है फितरत मुहब्बत की,
मिले तो नसीब वरना जूठा ज़माना हैं,

मिलन के बाद भी अधूरी है मुराद,
रुखसत के बाद अश्क़ ही बहाना है,

खामोशी बयाँ करे दर्द-ए-इश्क़ का,
हर चोट की आवाज़ एक तराना है,

इल्म है अंजाम-ए-मुहब्बत,लेकिन,
बिन सोचे कांटो पे क़दम बढ़ाना है !!!!

नीशीत जोशी 28.06.14

किसीके हाथ नश्तर तो किसीके हाथो में ……

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किसीके हाथ नश्तर तो किसीके हाथो में पत्थर है,
तेरे इस पुरे शहर का माहोल पहले से भी बद्दतर है,

कहीं पे आग,कहीं धमाका,तो कहीं पे है बलात्कार,
सितमगर के सितम ढाने का मानो ये कोई दफ्तर है,

मजहब के नाम पर लड़ाते है मासूमो को सब यहां,
भाई भाई में कत्लेआम करनेवालो के ये अख्तर है,

न जाने कब,कहाँ,कौन सा हादसा जन्म ले ले यहाँ,
तेरे शहर में हर हादसा के बाद का हादसा कमतर है,

होते जुर्म की तरक़्क़ी किस अल्फाजो में तफ़्सीर करूँ,
सादे लिबासों में छिपे गद्दार दहशतगर्ग़ से भी बद्दतर है !!!!

नीशीत जोशी 22.06.14

रखा क्या है वो अँधेरे में

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रखा क्या है वो अँधेरे में,
सो जाना तुम अकेले में,

रोशन होगा वो आफताब,
गुम होयेगी रात सवेरे में,

भूल जाना ग़मगीन लम्हे,
खुश रहना तुम अकेले में,

प्यार में तो दिल टूटेगा ही,
न फसना तू इस जमले में,

देखोगे अदा ख़ुबाँ की ऐसी,
न आना तू उसके घेरे में !!!!

नीशीत जोशी 20.06.14

तुज जैसा कहां पाउंगा

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तुज जैसा नज़राना कहां पाउंगा,
तुज जैसा मस्ताना कहां पाउंगा,

रह कर परदे में करते हो प्यार,
तुज जैसा दिवाना कहां पाउंगा,

करते हो कुरबान जान की बाते,
तुज जैसा परवाना कहां पाउंगा,

दिखाते हो राह भटके हुए को,
तुज जैसा दोस्ताना कहां पाउंगा,

माहीर हो रोते को हसाने के लीये,
तुज जैसा सहलाना कहां पाउंगा,

बसा लिया प्यार से प्यारे से घर में,
तुज जैसा आशियाना कहां पाउंगा,

मनाते हो रुठ जाने पे अपना कहके,
तुज जैसा ऐसा प्याराना कहां पाउंगा ।

नीशीत जोशी 18.06.14

કાશ, દિલના અવાજની એટલી થાય અસર

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કાશ, દિલના અવાજની એટલી થાય અસર,
જેને કરીએ યાદ અમે, તેને થઇ જાય ખબર,

હોય ભલે રાત ગોજારી,તણાઈએ છો આંસુએ,
બંધ કરીએ આંખીયું અને બસ તે આવે નજર,

ઝુલાવે ચાંદની રાત વિરહના પારણે અમને,
જીવવું પણ થાય આકરું અમારું તેના વગર,

આવી જાય થોડા આંસુ તેની પણ આંખો માં,
જોઈ કાંટે ચાલતા અમ કદમ રુધિરે સભર,

જોઈ આ ટુકડા હૃદયના કાંપે તેનું પણ મન,
વિસરી આગલું બધું,મોકલે આવવાની ખબર.

નીશીત જોશી 17.06.14

पूरी मेरी यह कहानी कर दे

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ऐय रब, पूरी मेरी यह कहानी कर दे,
आज के दौर की दुनिया पुरानी कर दे,

उन पर लगी तोहमत को भुलाकर अब,
इस दिल को पहले जैसा रूमानी कर दे,

कर सकते हो तुम हर मुराद पूरी सबकी,
न हो सके तो इश्क़ को जानकानी कर दे,

फिरसे कर देना उसका प्यार पहले जैसा,
मेरे उस मुहिब्ब को मेरी दीवानी कर दे,

रखना खुश मेरी वो बेनज़ीर मुहब्बत को,
उसे मेरे बेपायाँ प्यार की निशानी कर दे !!!!

नीशीत जोशी (जानकानी= process of dying) 14.06.14

જીવું છું હું,આપેલ તુજ ઝખ્મ જીરવી

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મુજ યાદ ને, દબાવી રાખી જોજે,
વિરહનો સ્વાદ પછી, ચાખી જોજે,

શું કરશે, તુજને ચાહનારી જમાત,
મુજને અંધારે, ક્યારેક નાખી જોજે,

વિલય થઇ જશે, તુજ નું સર્વસ્વ,
કંઈ નહીં રહે તુજ કાજ બાકી જોજે,

જીવું છું હું,આપેલ તુજ ઝખ્મ જીરવી,
એક તું પણ નાનો ઘાવ, સાખી જોજે,

ખુશ છે હૃદય, લઇ વ્યથાની સૌગાત,
હજી હોય બાકી તે પણ આપી જોજે.

નીશીત જોશી 12.06.14