तमन्ना

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तमन्ना है कि मैं एक हीरा हो जाऊं,
उनकी आँखों का सीतारा हो जाऊं,

दिलबर है मेरे दुनिया कि नजरो में,
ऐसा हो कि मैं उसका प्यारा हो जाऊं,

वोह बन जाए समंदर कुछ इस तरह,
मैं उसी समंदर का किनारा हो जाऊं,

वोह बने बागो में महकते फूलो जैसे,
मैं उसीके बाग़ का नजारा हो जाऊं,

वोह मिल जाए मुझे लगे इरम मिला,
मैं इस तुर्बत में सबसे न्यारा हो जाऊं !!!!

नीशीत जोशी (इरम= heaven, तुर्बत= earth) 21.02.14

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उस॓ दिल म॓ पनहा दी किसन॓

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याद आती थी म॓री उस॓ दिल म॓ पनहा दी किसन॓,
वो तसवीर को म॓री जीगर स॓ लगा दी किसन॓,

लगा क॓ दिल तनहा होन॓ की तावान हमन॓ द॓ डाली,
बात तो य॓ सच थी मगर तुझ॓ बता दी किसन॓,

जखम जो गहर॓ लग॓ थ॓, बन॓ जा रह॓ थ॓ नासूर,
पयार जता कर उन जखमो पर दवा दी किसन॓,

रिँद भी अब मयखान॓ स॓ बीन पीय॓ ही नीकल॓गा,
जो थी साकी की आँखो म॓ मय वो हटा दी किसन॓?

अब तलाश स॓ भी तौबा कर दी हमन॓,
अँजान राह म॓ मुहबबत जता दी किसन॓ ।

नीशीत जोशी 15.02.14

हर चराग आशियाने में बुझा के रखा है

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हर चराग आशियाने में बुझा के रखा है,
दिल में ही आफताब को जला के रखा है !!

ना आयेगा तलातुम भी समंदर में कभी,
हमने आँखों में ही दरिया बसा के रखा है !!

अब हमें कोई फ़िक्र नहीं रोशनी की यहाँ,
घर में हमने जुगनूओ को बुला के रखा है !!

कनीझ के घर भी तो शहजादी आती होगी,
हमने चांदनी को देख, सर उठा के रखा है !!

इस जमीं की पारसाई को तो देखो दोस्तों,
जिसने आसमान को भी जुका के रखा है !!

नीशीत जोशी ( तलातुम = storm, पारसाई = पवित्रता)04.02.14

જિંદગીનાં લાહવા

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જિંદગીનાં લાહવા, એકાંતમાં વધાવી લીધા,
જે પણ પછી મળ્યા ગમ, અપનાવી લીધા,

સાંભળવાને મુજ દર્દ, કોઈ ના મળ્યું જ્યારે,
રાખી અરીસો સામે, ખુદને જ રડાવી લીધા,

કહે છે મુજને પાગલ, આ દુનિયાના રીવાજો,
લઇ દોષના ફૂલો માથે, ખુદને સજાવી લીધા,

સમી સાંજનાં એ સમણાં, રોજ આવે છે અચૂક,
એ તો સપના છે! કહી ખુદને સમજાવી લીધા,

ઘણું થયું, હવે તો આવી છે નીંદર, આ દેહને,
કાંટાળી માટીના ઓઢણ, માથે નખાવી લીધા.

નીશીત જોશી 02.02.14

कुछ पल और सही

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कुछ पल और सही….तेरा इंतिजार और सही,
भूल जायेंगे पूर्णिमा को, तेरा दीदार और सही,

जीती बाज़ी मेरे हारने पे,चहेरा तेरा खिल गया,
तेरी ख़ुशी की खातिर, मेरी एक हार और सही,

ना ना करते हुए, यक़ीनन प्यार तुम कर लोगे,
मुसलसल मेरी ‘हाँ’ के बावजूद इज़हार और सही,

जो लगाया है पर्दा आयना पे, अब वो हटा देंगे,
फर्श पे आज दीदार-ए-क़मर एकबार और सही,

जिक्र होगा जब इश्क़ का, नाम आएगा अपना,
दास्ताँ-ए-इश्क़ में इन्कार व् इक़रार और सही !!!!

नीशीत जोशी (क़मर= moon) 31.01.14

तुम देते जो साथ, कुछ पल जी लेते

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तुम देते जो साथ, कुछ पल जी लेते,
तुम पीलाते ज़हर वो भी हम पी लेते,

शहरे खामोशा के जैसे बनाने को पल,
तुम कहते तो ओठो को हम सी लेते,

बेकल न रहती हमारी निगाह-ए-यास,
ज़ब्त-ए-ग़म खुदा से हम ले ही लेते,

मुहब्बत कि सदाक़त आती सामने,
दुनिया के वार-ए-तेग सह भी लेते,

तुम ना उठाते सवालात रवायत के,
जीते थे एकदूजे वास्ते वैसे जी लेते !!!!

नीशीत जोशी
(शहरे खामोशा= स्मशान, निगाह-ए-यास= उदास आँखे, ज़ब्त-ए-ग़म= दुःख सहने कि शक्ति,
सदाक़त= सत्यता, तेग= तलवार, रवायत= रश्मो रिवाज़) 28.01.14

જરા ઉભા તો રહો

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હવે મઝધાર હું જવાનો,જરા ઉભા તો રહો,
આપ્યો તેમણે પરવાનો,જરા ઉભા તો રહો,

ખુંદી નાખ્યું આભ,તો દરિયાની શું વિસાત,
તેના વિશ્વાસે તરવાનો,જરા ઉભા તો રહો,

આંખો સમા દરિયાનું માપી લીધું છે ઊંડાણ,
નથી હવે ડર મરવાનો,જરા ઉભા તો રહો,

નદી માફક દરિયામાં થઇ જઈશ હું લુપ્ત,
મળ્યો મોકો મળવાનો,જરા ઉભા તો રહો,

પ્રેમને વમળ કહેનારાઓ ઠરશે ખોટા હવે,
અપાર પ્રેમ હું કરવાનો,જરા ઉભા તો રહો.

નીશીત જોશી 26.01.14