चहेरा पहले से, नक़ाब में, छूपा होता

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चहेरा पहले से, नक़ाब में, छूपा होता,
कोई ख्वाब, रातो में, ना रूका होता,

न बहते, इन आँखों से, अश्क़ इतने,
ये दिल, कभी ना अगर, टूटा होता,

मुनासिब होता, दर्मियाँ दिवार रखते,
सामने आयना के, सर न जुका होता,

तसव्वुर कि देहर में, ना फसते कभी,
एतबार बेवफाई का, गरचे जूठा होता,

दोमंगीर न होते, उनके प्यार में ऐसा,
पहेली नजर पे ही, गर वोह रूठा होता !!!!

नीशीत जोशी (दोमंगीर= dependent)24.01.14

तसव्वुर, तुझे अब जाना होगा

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यक़ीनन तुझे अब आना होगा,
तसव्वुर, तुझे अब जाना होगा,

अलविदा हुई राह कि रुकावटे,
मुहब्बतका झखीरा पाना होगा,

दर-ओ-दीवार सजी है अब तो,
महेफिल में सुरूर लाना होगा,

गुफ्तगू होगी सिर्फ वफ़ा कि,
रक़ीब को धोखा खाना होगा,

सुनली बहोत ग़मगीन गज़ले,
नग्मा-ए-उश्शाक़ गाना होगा !!!

नीशीत जोशी (झखीरा= a treasure, नग्मा-ए-उश्शाक़= poem of lovers) 21.04.14

પાંખો ફેલાવી ઉડી જઈશું

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પાંખો ફેલાવી ઉડી જઈશું,
આકાશ આખું ખુંદી જઈશું,

મળે જો મોકો ઝળહળવાનો,
સુરજની સમા ઉગી જઈશું,

મહેકની રાખવા છાપ સાટું,
ફૂલોની માફક ખુલી જઈશું,

આભ ધરાનો પ્રેમ શોધવા,
કહોતો ક્ષતિજ સુધી જઈશું,

છોને વિલીન થઇ જતો દેહ,
અમ યાદ સૌ હૈયે મુકી જઈશું.

નીશીત જોશી 18.01.14

चलो उस रक़ीब को दोस्त बनाया जाय

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चलो उस रक़ीब को दोस्त बनाया जाय,
जहर को भी आज अमृत पिलाया जाय,

खुरचे थे जो ज़ख्म बन गये अब नासूर,
चलो प्यार से उसे मलहम लगाया जाय,

हमारे लिखे ख़त को तो मुद्दत हो चुकी,
जवाब पाने क़ासिद को घर बुलाया जाय,

खदान में रहके दिल पत्थर बना लिया,
चलो संगदिल को प्यार सिखाया जाय,

अदावत का मुदावा सिर्फ मुहब्बत ही है,
जो हो गये नाशाद उसे शाद बनाया जाय !!!!

नीशीत जोशी 16.01.14

उसे निस्तार चाहिए था, दस्ताना चाहिए था

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उसे निस्तार चाहिए था, दस्ताना चाहिए था,
क़त्ल करने मुझसे मेरा ही परवाना चाहिए था,

नजरो से घायल करते, तो मर जाते हम यूँ ही,
जराहत करने को उसे कोई बहाना चाहिए था,

खुद दिल को तक़सीम करे,तबीब भी खुद बने,
खुदके तरदामनी का हमसे जुर्माना चाहिए था,

रात थी अँधेरी,और सफ़र भी था तन्हा,मगर,
कुष्ट-ओ-खून के लिए उसे ठिकाना चाहिए था,

ज़ब्त में नहीं रहे थे जज्बात जिगर के,लेकिन,
वाबतगी के लिए उसे सारा ज़माना चाहिए था !!!!

नीशीत जोशी
(निस्तार= knife, परवाना= permit, जराहत=injured, तक़सीम= division, partition, तरदामनी= guilt, sin, कुष्ट-ओ-खून= killing and murdering, ज़ब्त= control, वाबतगी= relationship) 14.01.14

जख्म को खुरच कर उसे ताज़ा रखते है

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जख्म को खुरच कर उसे ताज़ा रखते है,
हम अपनी मुहब्बत में कुछ खासा रखते है !!

डरते नहीं रक़ीब के नए जख्म से अब तो,
हम अपनी मुहब्बत का ही इफ़ाक़ा रखते है !!

क़त्ल करो खंजर से या अपनी नजरो से,
हम अपने जज्बे को ही कातिलाना रखते है !!

हटा दो चाँद या बुझा दो यहाँ की रोशनी,
हम अपने घर में जुगनुओ से उजाला रखते है !!

समज गए है अब मुहब्बत की बारीकियाँ,
हम दिल टूट जाये तो उसका चारा रखते है !!

नीशीत जोशी
(खासा= specialty,इफ़ाक़ा= relief, healing process ,चारा= remedy) 11.01.14

शायद तेरी होगी

Edward John Poynter (English Classicist painter, 1836-1919) Hot-house Flower
दिल पे दी गयी दस्तक शायद तेरी होगी,
तड़पते दिल की कसक शायद तेरी होगी,

रातभर सोने ना दिया वो तसव्वुर ने हमे,
आँखों में उतरी झलक शायद तेरी होगी,

हर गली में हमें रहबर मिलते है अक्सर,
शहर से गुजऱती सड़क शायद तेरी होगी,

बाग़ में जा कर छुआ होगा फूलो को तूने,
उन फूलोसे आती महक शायद तेरी होगी,

दिल मचल जाता है तेरी यादो के आते ही,
धड़कन के पीछे की धड़क शायद तेरी होगी !!!!

नीशीत जोशी 08.01.14