अकेले न थे मगर हो गये अकेले

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रंज-ओ-ग़म से वाकिफ है ज़माना,
जल के खाक हुआ आशियाना,

दिल-ए-ख़ास से मिली है वो सजा,
जुगनू ने जला दिया है परवाना,

सुनके अझान निकल पड़े आंसू,
दुआ का मुन्तझिर रहा दीवाना,

शहर-ए-खामोशा ने भी न दी जगह,
मैयत पे जो न हुआ उनका आना,

अकेले न थे मगर हो गये अकेले,
भूल गये सब जज्बात-ए-इश्क जताना !!!!

नीशीत जोशी 26.10.13

” આનંદ “

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” આનંદ ”

ખુશીઓ મળે છે અહી,
પણ માને છે કોણ?
આનંદ છે ધણો અહી,
પણ માણે છે કોણ?

બને છે કળીથી ફુલ,
આપે સુગંધ સૌને,
રાત, સુદંર સપના આપે,
ચંન્દ્ર શીતળતાનો આનંદ,
રવિ ની પહેલી કિરણ, પ્રભાત આપે,
મિત્ર આપીને સહકાર, આપે આનંદ,
એકબીજાનો અગાઢ પ્રેમ,
વધારી ઉત્સાહ, આપે આનંદ,

ન રહો રડતા, જીવન છે આંનદ
જીવો અને જીવાડો,
લઇ મધુર જીવનનો આંનદ,
ભુલી બધા ગમ,હર ક્ષણ મનાવો આનંદ,
ન વેડફો સમય, મનાવો આંનદ,
મળ્યા છે ચાર દિન જીવનમાં,
ભુલી દુઃખ નિરાશા, મનાવો આંનદ .

નીશીત જોશી

શબ્દો વણાય જાય છે એવી રીતે

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શબ્દો વણાય જાય છે એવી રીતે,
કાવ્ય બની જાય છે આગવી રીતે,

વાંક તુજ કાઢવો કે પછી કલમનો,
પ્રશ્ન નો જવાબ પામવો કેવી રીતે,

સુવાસ પ્રસરે છે તુજ આગમનની,
ફૂલો ફેલાવે સ્વ-સુગંધ તેવી રીતે,

હૃદયને જાણે જગ મળ્યું એક સ્મિતે,
લહેરોને મળે છે કિનારા જેવી રીતે,

તુજના સાથથી બન્યું જીવન રોશન,
દીવાથી અંધારું થયું દુર જેવી રીતે.

નીશીત જોશી 25.10.13

जज्बात को हमारे आजमाते है वोह

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जज्बात को हमारे आजमाते है वोह,
जब कभी मुलाक़ात पे आते है वोह,

गुफ्तगू करने की इल्तजा थी उनकी,
ख़ामोशी की अदा अब समजाते है वोह,

न पीने की कसम डाल दी है हम पे,
मयकदे का रास्ता अब दिखाते है वोह,

जान दिया करते थे इक मुस्कान पे,
तन्हाई की चादर अब ओढ़ाते है वोह,

दीवानगी की हद पार की प्यार में ,
नफ़रत की आंधी अब चलाते है वोह,

रकीब से सिख लिया फरेबी सबब,
दोस्ती का सिला अब बताते है वोह !!!!!

नीशीत जोशी 24.10.13

तन्हा वोह भी हुआ होगा

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तन्हा हम हुए, तन्हा वोह भी हुआ होगा,
बादल है यहाँ आज ,चाँद कहीं छुपा होगा,

तुर्बत में छाया हुआ है अंधेरो का आलम,
जल गया वो दिल, धुँआ वहां भी उठा होगा,

वस्ल की रात भी हिज्र की शब् बन गयी,
बह रहे थे आंसू,आँखोंने भी कुछ सुना होगा,

मुहब्बत की राह ने पामाल किया दोनोंको,
सहते रहे जख्म,उनको भी कुछ हुआ होगा,

तोहमत दे कर जहाँवालो ने कर दिया बदनाम,
बदनामी की हवा ने उनको भी छुआ होगा,

अँधेरा जो यहाँ है, वैसा वहां भी घिरा होगा,
जुगनू लौट गये यहाँ ,चराग वहां भी बुझा होगा !!!!

नीशीत जोशी 22.10.13

मुझे याद है

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तेरा तिरछी नजरो से निहारना मुझे याद है,
तेरा प्यार का परचम फहेराना मुझे याद है,

लाल-फाम से ओठो को शरमाते चबाना तेरा,
चुपचाप मेरे गालो पे बोशा लेना मुझे याद है,

पी के तेरी नयनो के जाम बेकाबू थे हम तो,
मेरे साथ साथ तेरा भी लहेराना मुझे याद है,

इक ही पुकार पे तेरा यूँ छत पे दौड़े आना,
गूफ्तगू करना, हसना हसाना मुझे याद है,

आज तुम कहाँ,मैं कहाँ,सिर्फ यादे रह गयी,
अर्षा हुआ पर वो गुजरा ज़माना मुझे याद है !!!!

नीशीत जोशी 20.10.13

हम आपका क्या लेते है?

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ये तो फरमाइये हम आपका क्या लेते है?
आप बेवजह जो मुहँ हम से छुपा लेते है,

खोर-ओ-नोश भूल गये आपकी याद में,
हम तो आपके चहरे का जाएझा लेते है,

सादिक कहा था आपने मुहब्बत का हमें,
फिर यूँ मुझे तड़पा के क्यों मजा लेते है?

इश्क का इश्तिहार छपा है चहरे पे मेरे,
पर्दा करके तन्हाई का क्यों परचा लेते है?

प्यार पे अब भी नहीं है यकीन,फिर आप,
प्यार की वाकिफियत ले के क्यों हवा लेते है?

नीशीत जोशी 18.10.13