हमें आता नहीं


तुम्हे कैसे भुलाया जाए ये हमें आता नहीं,
यादो को कैसे सुलाये, कोई समजाता नहीं,

जागती रहती है ये आँखे,ना कह नहीं पाते,
क्या करे रातो को तेरा वो ख्वाब जाता नहीं,

सुनहरे पल जो कभी साथ बिताये थे हमने,
क्या करे आँखों से वो पर्दा कोई हटाता नहीं,

अपना कहने को बचा था एक दिल,गवा बैठे,
क्या करे वापसी का दिन कोई बताता नहीं,

हमने खेली थी हर बाज़ी हारने की ज़िद में,
क्या करे जीत का वो जश्न कोई जताता नहीं !

नीशीत जोशी 23.11.12

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तेरे आने का पैग़ाम अब लायेगा कौन ?


तेरे आने का पैग़ाम अब लायेगा कौन ?
अंजुमन में आफ़ताब दिखायेगा कौन ?

मियाद पूरी होने पे ही ठिकाने पहुंचेंगे ,
अधूरे ख्व़ाब की अधूरी राह जायेगा कौन ?

ज़मीं के हो कर रह जायेंगे ज़मीं पर ही,
वो अर्श-ओ-फ़र्श का फ़र्क बतायेगा कौन ?

फँसी कश्ती निकल आये जो इत्तेला मिले,
अब बिन पतवार कश्ती को बचायेगा कौन ?

ज़िन्दगी की किताब के पन्ने कोरे रह गए,
अब ख़ून भरी कलम से लिखवायेगा कौन ?

नीशीत जोशी 21.11.12

नफ़रत की हम हिफाजत नहीं करते


हम किसी की हिमायत नहीं करते,
आप भी कभी इनायत नहीं करते,

दिल जिसे कहते थे अपना, मगर,
लुटा बैठे, पर शिकायत नहीं करते,

गरीब बन के प्यार की इल्तजा कि,
शाह है पर हम सियासत नहीं करते,

नासमज, करते रहे वजन तौफे का,
प्यार में हम किफायत नहीं करते,

मुहोब्बत कि है, करते रहेंगे ता’उम्र,
नफ़रत की हम हिफाजत नहीं करते !

नीशीत जोशी 19.11.12

આ જગ માં જુઓ બધા બેહાલ છે


આ જગ માં જુઓ બધા બેહાલ છે,
મારા પણ કંઈક એવા જ હાલ છે,

મોંઘવારીએ વાળ્યો છે એવો દાટ,
કેળાની પણ હાથમાં આવે છાલ છે,

નથી લઇને જતા બાળકો ને બહાર,
હવે તો રજા માં આરામ જ ઢાલ છે,

હૃદય રુદન કરતુ રહે અંદરો અંદર,
‘ને ચહેરાએ પહેરી હાસ્યની ખાલ છે,

ખિસ્સામાં છો ને કંઈ નાં હોય, તો શું?
વાતોમાં તો બધા જ માલા-માલ છે.

નીશીત જોશી 17.11.12

कोई कुछ भी कहे औरत के बारे में यहां


मां से बडी जहां मे खजालत नही होती,
प्यारी बीबी से बडी लताफत नही होती,

प्यार हो जाता है पहेली नजर में, मगर,
प्रेयसी से बडी कोइ कयामत नही होती,

भाई बहन का प्यार अनमोल है जहां में,
बहन जैसी किसी की हिफाजत नही होती,

एक ही फर्क होता है लडके और लड़की में,
अपनी बच्ची से कोइ हिमायत नही होती,

कोई कुछ भी कहे औरत के बारे में यहां,
उससे बडी कुदरत की करामात नही होती ।

नीशीत जोशी 16.11.12
…ख़जालत= happy, auspicious, and blessed, लताफत= pleasantness

सुलग उठता है जिगर


सुलग उठता है जिगर तुजे भूलाने से,
दिल बैठ जाता है यहाँ तुजे बूलाने से,

वो सुक जाते है शाक के पत्ते पेड पे ही,
शाक भी रो पड़ती है तुजे न जूलाने से,

सपनों ने भी नींद का रास्ता छोड़ दिया,
ये जागती रहती है आँखे तुजे सूलाने से,

इन होठो को हसते हुए हो गए है अरसो,
मगर बाज़ नहीं आते हो तुम रुलाने से,

तैरता है बदन पानी के ऊपर समन्दर में,
लहर शायद थम जायेगी लाश डुबाने से !

नीशीत जोशी 15.11.12

फरिस्तो ने


बेहिस्त जाते हुए रोका फरिस्तो ने,
खुदा का वास्ता दे, टोका फरिस्तो ने,

कारगर ना हुए प्यार की राह चलके,
यहाँ भी दे दिया धोका फरिस्तो ने,

रूबरू हो जाते तो रंजिश भी न रहेती,
विरह की आग में जोंका फरिस्तो ने,

सुन ली होगी किसी अपनो की दुआ,
पुरदर्द रास्ता समज टोका फरिस्तो ने,

हदीस पढ़ निकले थे हबीब पाने को,
पादश भूल, दिया मौका फरिस्तो ने,

नीशीत जोशी
बेहिस्त= heaven, पुरदर्द= sorrowful,
हदीस= words of Prophet Mohammed, पादश= punishment