एक ही इल्तजा


गुम हो कर किसी कुचे में खो जायेंगे !
मिटटी के है मिटटी में जब सो जायेंगे !!

ख्वाइश थी, छू लिया बुलंदीओ को भी !
जमीं के थे और जमीं के ही हो जायेंगे !!

नहला कर पहना दिया है नया लिबास !
रकीब भी अब करीब आ कर रो जायेंगे !!

एक पौधा जिसे उखाड़ फेका है लोगो ने !
कोशिश करके प्यार का बीज बो जायेंगे !!

एक ही इल्तजा रखी थी जो पूरी होगी !
तेरे थे, तेरे ही आगोश में अब सो जायेंगे !!

नीशीत जोशी 24.09.12

यहाँ न करेगा कोई तुज पे रहम


यहाँ न करेगा कोई तुज पे रहम,
पाल रखा है मन में यही भरम,

सच्चाई की राह पे निकल पड़ो,
न करना जमाने की कोई शरम,

मिलेंगे हर रास्ते पर बड़े पत्थर.
पर न कभी छोड़ना अपने करम,

साथ आ जायेंगे तेरे वो रकीब भी,
मुहोब्बत जता के रहोगे जो नरम,

आग पे चलने की जो आदत होगी,
सूरज की कड़ी धुप न लगेगी गरम |

नीशीत जोशी 22.09.12

મન ને કહેજો


મન ને કહેજો કે આભે ઉડાવે નહી,
ઉડાવી ઉડાવી ને બહુ નચાવે નહી,

ક્યાંક પતંગ માફક કપાઇ જઇશું તો,
કહેજો તેને સૌની સમક્ષ ચગાવે નહી,

છો ઉડાવે ઉંચે આકાશે રાખીને ધ્યાન,
પગ નીચેથી કદી જમીન હટાવે નહી,

ઉડીને ભલે દેખાડે રાત્રે મધુર સપના,
પણ કોઇના વિયોગે રાત જગાવે નહી,

નાજુક છે મન એક ઝટકે તુટી પણ શકે,
કહેજો તેને એ વ્યથા કોઇને બતાવે નહી.

નીશીત જોશી 20.09.12

ऐसा हरबार नहीं होता


हर पहेलु का इन्तजार नहीं होता,
ऐसा इश्क यूँ बार बार नहीं होता,

कायल हो गए तेरी नजरो के हम,
किसी और से हमें प्यार नहीं होता,

मयकदेसे बिन पिए निकलू तो कैसे,
आँखों के मय का इन्कार नहीं होता,

शराफत का परदा रखा है आँखों में,
सरेआम प्यारका इजहार नहीं होता,

गुस्ताखी हो जाए तो मॉफ कर देना,
हुआ है प्यार ऐसा हरबार नहीं होता,

नीशीत जोशी 19.09.12

***शीर्षक अभिव्यक्ति” में उनवान ….”पवित्र /पावन” पर मेरी कोशिश***

ना कोई भी संग और न कुछ भी जायेगा साथ,
खाली हाथ आये थे और खाली ही रहेगा साथ,

जिस पिंजरेका रखके मोह बिगाड़ा जीवन सारा ,
बसा परिंदा उसमे,बिन कहे,समय पे,उड़ेगा साथ,

मेरा-तेरा के बना लिए खुद ही ने नियम-क़ानून,
जाने बाद तुम्हारे, हर कायदा भी भटकेगा साथ,

न बैठते थे पलभर भी,वोह भी बैठेगे आज पास,
देख खाली पिंजरा, आँखों को भी नम करेंगे साथ,

पवित्र पावन बन जाओ, न बांधो कोई खोटे करम,
इस जन्म के कर्मो का बोज उठाना पड़ेगा साथ !

नीशीत जोशी 18.09.12

પીંજરાનો ખાલીપો


નહી રહે કોઇ સંગાથ,કે ન કંઇ પણ જશે સાથે,
ખાલી હાથે આવેલો અને ખાલી જ રહશે સાથે,

જે પીંજરાનો રાખી મોહ,જીવન બગાડ્યુ આખુ,
તેમાં વસેલુ પક્ષી,વીન કહ્યે,સમયે,ઉડશે સાથે,

મારા-તારાના બંધારણ,ઘડી કાઢયા આપમેળે,
તુજ ગયા બાદ,બનેલા કાયદા પણ ભમશે સાથે,

નહતા બેસતા બે ઘડી,તે પણ બેસશે આજ પાસે,
પીંજરાનો ખાલીપો જોઇ આંખોને નમ કરશે સાથે,

બાંધે છે શાને કાજે રોજ નીત નવા સંચીત કરમો,
આ જન્મે કરેલા કર્મોનો બોજ ઉપાડવો પડશે સાથે.

નીશીત જોશી 18.09.12

कोई फर्क नहीं अश्क और पानी में


कोई फर्क नहीं अश्क और पानी में,
आँखे बहती रही तेरी महेरबानी में,

गुमसुदा हो गए तुजे पाने के वास्ते,
मंजिल पा के भी खो गये जवानी में,

हालत पर मेरी गौर ना करना अब,
ये जिंदगानी बीतेगी तेरी दीवानी में,

टुटा आयना जोड़ने का फन सिखा है,
पर तुजे किस हक से डाले परेशानी में,

समंदर डूबा न सका साहिल के डर से,
मुझे अब डूबने देना आँखे के पानी में !

नीशीत जोशी 17.09.12