बड़ी गुस्ताख है तेरी यादे


तस्सवुर में हरदम तेरी तस्वीर उभर जाती है,
धड़कन तेरे नाम बगैर आने से मुकर जाती है,

बड़ी गुस्ताख है तेरी यादे इसे तमीज सिखा दो,
दस्तक भी नहीं देती और दिल में उतर जाती है,

सारा दिन दीवाना बेचैन बना के रखती है मुझे,
सारी सारी रात तेरी ही यादो में गुजर जाती है,

उतर आये परहेज नहीं इस तड़पते दिल को कोई,
हसीन यादो के सहारे ही मेरी बची उमर जाती है,

याद के आने से कलम भी दिखाती है हुन्नर कोई,
यादो में लिखी हर गलत ग़ज़ल भी सुधर जाती है |

नीशीत जोशी 25.08.12

कुछ और बात होती


तुम अगर मुझे मिल जाते तो कुछ और बात होती,
तुम गर मेरा साथ निभाते तो कुछ और बात होती,

जो लगाई है उस महेंदी का रंग और निखर जाता,
मेरे नाम हाथो में सजाते तो कुछ और बात होती,

किसी और के बुलाने पे चल दिए हो दुल्हन बनकर,
मेरी आवाज सुन चले आते तो कुछ और बात होती,

दिल की धड़कने भी धीमी पड़ गयी तेरे चले जानेसे,
दर्द-ए-दिल का इलाज बताते तो कुछ और बात होती,

भूल गए है मुश्कुराना तुजसे बिछड़ने के बाद हम तो,
अगर साथ रह के हमें हसाते तो कुछ और बात होती !

नीशीत जोशी 24.08.12

इस दौर में


इस दौर में जो देखना नहीं है वही दिखता है,
महेंगायी में वोह बेचारा गरीब ही पिसता है,

इन्सान जी रहा है आतंक के डर से जहां में,
और आतंकवाद आसमाँ चढ़ कर चीखता है,

कमान संभाली हुयी है हमारे चुने नेताओं ने,
सेवाभाव भूल के वो खुर्शी के लिए बिकता है,

न जाने किसको दोष दे ये जालिम जमाने में,
बच्चा भी जन्म के साथ भ्रष्टाचार सिखाता है,

लोग तो दौड़े जा रहे है आगे बढ़ने की हौड में,
भाई खुद के भाई को पछाड़ने टांग खिचता है,

सिकंदर बने फिरते है देशद्रोही भी अपने यहाँ,
शरण भी उन्हें अपनी सरकार से ही मिलता है,

न ठहर पायेगा खुदा भी आज इस धरती पर,
पल पल बरदास्त कर इंसानी जीवन निभता है !

नीशीत जोशी 23.08.12

र्शीषक अभिव्यक्ति मेँ उनवान *** “जग/जगत/विश्व/दुनिया/संसार/जहान” पर मेरी कोशिश


र्शीषक अभिव्यक्ति मेँ उनवान *** “जग/जगत/विश्व/दुनिया/संसार/जहान” पर मेरी कोशिश

यह दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है,
प्यार के बाजार में दिल भी जाए तो क्या है,

बहारो के मौसम में भी तो मुराजाते है फुल,
पतजड़में गर फुल खिल भी जाए तो क्या है,

मिलने पर अमावस्या भी लगे चाँदनी जैसी,
पूर्णिमाको गर चाँद हील भी जाए तो क्या है,

जहांवाले तो कहते ही रहेगे प्यार को गुनाह,
मगर टुटा दिल गर सील भी जाए तो क्या है,

इल्तजा है उनके मुह से इकरार सुन लेने की,
एकबार वोह अकेले मिल भी जाए तो क्या है !

नीशीत जोशी 22.08.12

कुछ लिखा नही है


आज ये दिल अभी चिखा नही है,
बाज़ार में वो प्यार बिका नहीं है,

लिखने बैठे थे कागज़ ले कर हम,
कलम ने आज कुछ लिखा नही है,

अल्फाज उतर आयेंगे ऐसे तो यहाँ,
पर तेरा ख्वाब अभी दिखा नही है,

कैसे कहे हर चहेरा को नुरानी सा,
तेरे आगे कोई चहेरा टिका नहीं है,

यादो से परेशान है कलम भी आज,
जुस्तुजू बयाँ करना सिखा नहीं है,

नीशीत जोशी 21.08.12

તુજની યાદ


સાંજ થાય છે ‘ને તુજની યાદ આવે છે,
રાત્રે નીદંરમા તુજના સ્વપ્ન સતાવે છે,

હજી પણ એ જ છુ એવો જ છુ તુજ કાજે,
શા માટેને બીજાના ઉદાહરણો બતાવે છે,

લોકોએ તો બનાવ્યો છે ચર્ચા નો વિષય,
મુજની નુખ તુજ નામ પાછળ લગાવે છે,

બળતુ રહે છે મુજ હ્રદય ચીરાગ માફક,
પણ તુજ દિલ શા માટે આમ જલાવે છે,

સોપી એ દિલ એકરાર કરી લીધો પ્રેમનો,
શાને તુજ નયનો મુજ નયનથી બચાવે છે .

નીશીત જોશી 20.08.12

” ईद मुबारक “


आप सभी भाईओ को ” रमदान ” के आखरी दिन की मुबारकबाद
और साथ साथ सभी को ” ईद मुबारक ”

नबी से मिलने की कशिश सीने में है,
बंदगी की ख़ास मजा तो मदीने में है,
उनके आगोश से छूटने का न लू नाम,
फूलो सी वो खुश्बू उनके पसीने में है…….

नीशीत जोशी 19.08.12