चाहत ना आजमाई होती


तुने मेरी चाहत ना आजमाई होती,
दिल पे यह खामोशी न छायी होती,

दो चार कदम अगर साथ चल लेते,
आज तेरे ही पीछे मेरी परछाई होती,

रुसवा कर के न तोड़ते दिल हमारा,
तेरी ही यादो में ना रात बिताई होती,

गर समज लेते आँखों की बात सब,
आँखोंने कभी ना बारिश बहाई होती,

इल्तजा थी प्यार की, सबुरी न थी,
मान लेते तो आज ना रुसवाई होती !

नीशीत जोशी 27.07.12

देख के तुजे


देख के तुजे आयना मगरूर क्यों हुआ,
ये चाँद भी छुपने पे मजबूर क्यों हुआ,

काशीद बन के आये थे ख्वाब रात को,
फिर ये चहेरा इतना मशहूर क्यों हुआ,

चला तजकिरा तेरी मूहोब्बत का यहाँ,
वो दास्ताँ खुदबखुद मज़कूर क्यों हुआ,

तुम प्यार से बना लेते हो सबको अपना,
कमाल है, रकीब भी मखमूर क्यों हुआ,

बनाये है हर चहेरे उसी आका ने जहाँ में,
खुदा को भूल के खुद मशकूर क्यों हुआ .

नीशीत जोशी 26.07.12
काशीद = खबर पहोचानेवाला , तजकिरा = जिक्र , मज़कूर = विवरण,मखमूर =नशे में चूर , मशकूर= आभारी

વર્ષો થઇ ગયા


પ્રેમપગલા ની શરુઆતને વર્ષો થઇ ગયા,
એ જીતેલી બાજીની માતને વર્ષો થઇ ગયા,

યાદને રાખી છે સાંચવી,ક્યારેક તો આવશે,
પુછેલા તેમના સવાલાતને વર્ષો થઇ ગયા,

કહેણ મોકલાવી તે પુછાવે છે કેમ છો તમે?
એક સાથે ગુજારેલી રાતને વર્ષો થઇ ગયા,

ખુમારી હજી તો ઉતરી નથી ચડેલા નશાની,
આંખોમાં ડુબ્યાની એ વાતને વર્ષો થઇ ગયા,

રીસાઇ જવાનુ હુન્નર ખુબ દેખાડ્યુ’તુ તમે તો,
અમે ભેગી કરેલી એ જમાતને વર્ષો થઇ ગયા.

નીશીત જોશી 25.07.12

એ રાત !


નવલી રાત વિતાવવા સપના મોકલજે,
સપનામાં અવાજ સમા ટહુકા મોકલજે,

જુદા જુદા ચિત્રો દેખાડવા બંધ કરો હવે,
રાતને એ તો નહોતુ કહ્યુ કેટલા મોકલજે,

કરજો એ મધુર મીલનની વાતો સ્વપ્ને,
ચાંદનીની સાટુ મનમીત ચંદ્રમા મોકલજે,

ઉંઘથી ન જાગી જવાય તે જોજે એ રાત !
પરોઢીયુ ન આવી શકે તે તાળા મોકલજે,

એ સપના પણ ન પડી જાય ઢીલા નીદરે,
તેને પણ રોજની માફક ઉજાગરા મોકલજે .

નીશીત જોશી 22.07.12

गुमशुदा जिन्दगी


गुमशुदा जिन्दगी वीराने में कट जाया करती है,
अपने परायोके बिच ज़मेलोमें बट जाया करती है,

सबक मिलते हुए भी गुमान में रह के जीनेवालो,
इन्सानकी जोली इंसानियतसे फट जाया करती है,

ये दौर चला है खुद की ही थाली में छेद करनेका,
दौलत के वास्ते रकीबसे दोस्ती सट जाया करती है,

मूहोब्बत भी हो गयी है हवस का एक खेल जहाँ में,
सच्ची मूहोब्बत होने से खुद ही नट जाया करती है,

सही नसीहत से तौबा करते है लोग इस दुनिया के,
कहीं कुछ कह दे तो जिन्दगी खुद हट जाया करती है |

नीशीत जोशी 20.07.12

प्यास जो बुज़ा न सकी


प्यास जो बुज़ा न सकी उसकी रवानी होगी,
रेत पे लिखी हुई कोई वो मेरी कहानी होगी,

वक्त उन अल्फाजो का मफ़हूम बदल देता है,
देखते ही देखते उनकी हर बात पुरानी होगी,

कर गई थी जो मेरी पलको के सितारे रोशन,
वो ढलते हुए सूरज की कोई निशानी होगी,

फिर अँधेरे में न खो जाए कही उसकी सदा,
दिल के आँगन में नयी रोशनी जलानी होगी,

अपने ख्वाबो की तरह ये बिखरे टूटे हुए फुल,
चुन रहे है शायद कोई तस्वीर बनानी होगी,

बेजुबान कर गया मुजको सवालों का हुजूम,
जिंदगी आज तुम्हे हर बात बतानी होगी,

कर रही है जो मेरे उन अक्स को धुधला,
मैंने दुनिया की कोई बात ना मानी होगी !!!!

नीशीत जोशी 19.07.12
मफ़हूम = meaning, सदा = sound, हुजूम = crowd, अक्स = reflection

सन्मान दो औरत को


घर में राम की शंका और बाहार रावण का डर,
यही सोच में औरत की होती है जिन्दगी बसर,

माँ बनी,बेटी बनी,कभी बनी बहन तो कभी बहु,
सहती रहे जीवन भर रख के अपना नीचा सर,

माना आज की नारी में आया है बदलाव फिरभी,
मर्दाना समाज मे चलना पड़े संभल संभल कर,

हर काम की माहिर हो गयी है आज जमाने में,
मर्दके अहम् टूटने का आता उस पे बहोत असर,

बस अब बहोत हुआ !!!!!

डर तो आखिर डर है, क्योकि वो एक औरत है ?
नादाँ हो,भ्रम अब तोड़ देना,बचाना अब खुद घर,

जाग गयी है नारी , नहीं है वो अबला ना बेचारी,
ओ मर्द ! फितरत छोड़ना, न होना फिर वही बन्दर,

समय रहते तुम संभल जाओ छोड़ के वो अहम्,
सन्मान दो औरत को, इश्वर ने ही बनाए नारी-नर |

नीशीत जोशी 18.07.12