न जायेगा


अपनो को कभी पराया किया न जायेगा,
जज्बात को यूं इल्जाम दिया न जायेगा,

कठपुतलीया है हम तो इस रंगमंच की,
‘मैं’ के गुमान में ऐसे जीया न जायेगा,

हर महेफिल तो नही होती है गमगीन,
खुशी को गम के जैसे लीया न जायेगा,

अब तो जहर आम हो गया है प्यार में,
मीला अमृत भी तो अब पीया न जायेगा,

खुद के करम और तोहमत दे खुदा पर,
सर पे आसमां फटे तो सीया न जायेगा ।

नीशीत जोशी 27.04.12

Advertisements

पीनेवालो


मयकदे में जाम टकराया जायेगा,
नाम का प्याला छलकाया जायेगा,

लडखडा भी जाये जो कदम अगर,
साकीया को बखुबी बचवाया जायेगा,

भटके राही जो मील जाये कही पर,
उसे भी मयखाने पहोंचवाया जायेगा,

जो पहोंच जाये एकबार उस दर पर,
बार बार दिल से उसे बुलवाया जायेगा,

हिचकी जो चडे तो जरा ठहर जाना,
वरना प्याला तो यूंही भरवाया जायेगा,

पीने का शोक हो बेजीझक पी लेना,
नयनो की महेफिल को सजवाया जायेगा,

पीनेवालो को ही मीलती है ईजाजत,
नामुरादो को मजलीश से हटवाया जायेगा ।

नीशीत जोशी 26.04.12

तू बडॉ से भी बडा


तू बडॉ से भी बडा कलंदर है,
ढूंढते है बाहर पर तू अंदर है,

जहां में जीत का गूमान क्यों?
तू सीकन्दरो का सीकन्दर है,

रहमत मीले हो सफल जीवन,
सूना तू रहमो का समंन्दर है,

ये दुनीया लगे छोटी तेरे आगे,
आसमांसे भी बडा तू अंम्बर है,

अपनी किस्मत का रोना कैसा,
तू दिदार में आये यही मंझर है ।

नीशीत जोशी 24.04.12

હોવા જોઇએ !


દરીયાના આંસુ પણ ખારા હોવા જોઇએ !
પણ લહેરોના વહેણ સારા હોવા જોઇએ !

સમર્પિત થઇ નદી બની જાય છે ખારી,
પ્રેમના ઉન્માદો તેના ન્યારા હોવા જોઇએ !

ચાંદ ચાંદની ની વાતો થઇ હવે પુરાણી,
હવે પ્રેમીના નામે આભે તારા હોવા જોઇએ !

એ પ્રેમ ને માની લઇએ જો અદ્દભુત રમત,
એ રમનારાઓ ના પણ નારા હોવા જોઇએ !

થઇ જાય પ્રેમ માં તરબોળ બધા પોતાના,
ત્યાર બાદ પારકાના પણ વારા હોવા જોઇએ !

નીશીત જોશી 23.04.12

રિસામણા– મનામણા


તુજને મનાવવામાં વાર લાગે છે,
જીતેલી બાજી પણ હાર લાગે છે,

પ્રેમ ના હજી કેટલા પ્રમાણ આપુ?
મુજની હર વાતોમાં ખાર લાગે છે,

તુજ મૌનની ભાષા પણ છે નીરાળી,
અસ્મીત ચહેરો દિલને માર લાગે છે,

નફરતમાં જીવન ન થઇ શકે પસાર,
પ્રેમ જ જીવનનો સાચો સાર લાગે છે,

કોલ આપ્યો હર ક્ષણ સાથ આપવાનો,
આજ એ કોલ પણ મુજને ગાર લાગે છે,

ન તડપાવ હવે મનાવુ છું ખરા હ્રદયથી,
ધોમ ગ્રીષ્મનો તાપમાં પણ ઠાર લાગે છે.

નીશીત જોશી 21.04.12

नही पाते है


चाहकर भी हम तुजे हकीकत कह नही पाते है,
करते हो जो सीतम मुज पे वो सह नही पाते है,

तेरे रंज से अब तो जीना भी हो रहा है दुस्वार,
ठहर गये आंखो के अश्क मेरे बह नही पाते है,

कुछ वाकिये को भुल जाना ही होता है बहेतर,
बुनीयाद मजबुत हो तो मकान ढह नही पाते है,

तीनका तीनका जोड हमने बनाया आशीयाना,
उस घर में बेगैर तेरे अब हम रह नही पाते है,

तुफान में भी रास्ता बना लिया उन लहेरो ने,
तेरे प्यार को तरसते है मगर वह नही पाते है ।

नीशीत जोशी 20.04.12

बहोत है


अब कोई जरुरत नही है मेरी, तेरे चाहनेवाले बहोत है,
कमजोर पडी ईबादत मेरी, दुआए करनेवाले बहोत है,

रुठ भी गर जाओ अब, यहां तुजे मनानेवाले बहोत है,
खुद को सजा के रखना, आयना दिखानेवाले बहोत है,

एक सीतम तु भी करले, यहां सीतम ढानेवाले बहोत है,
मेरी मजबुरी सुन तो ले, पर हां ! सुनानेवाले बहोत है,

फूल पे नाम लिख देना, कब्र पे फूल चडानेवाले बहोत है
शब्दो को तोडमरोड दिया, बहेतरीन लिखनेवाले बहोत है,

मिले सुहाग की कद्र कर, सुहाग को तरसनेवाले बहोत है,
हमने गुजारे थे गुजर जायेगी, ठोकर मारनेवाले बहोत है ।

नीशीत जोशी ‘नीर’ 16.04.12