मुझे अच्छा नही लगता


तडप तडप कर ईन्तजार में रहना मुझे अच्छा नही लगता,
बार बार उन गमो को जाहीर करना मुझे अच्छा नही लगता,

दिल तो करता है ये जीन्दगी किसी कातील के हवाले कर दु,
उनकी जुदाई में रोज रोज का मरना मुझे अच्छा नही लगता,

एक ही बार में जला के खाक कर दो ना मुझे चिता पे सुलाके,
दिल में जल जल के फिर से जलना मुझे अच्छा नही लगता,

वोह गर दे दे हाथो से एक कतरा भी तो समंन्दर सा मान लेगें,
दूसरो के हाथो अमृत प्याला भी भरना मुझे अच्छा नही लगता,

वो रात कि नींद भी खफा हो गयी है मेरी हालत देख कर, गोया,
जाग जाग के रोज ‘नीर’ सपनो को पढना मुझे अच्छा नही लगता ।

नीशीत जोशी ‘नीर’ 25.03.12

नाजुक ये दिल


नाजुक ये दिल अश्को में बह जायेगा,
साया भी मेरे बाद ये बात कह जायेगा,

भरोषा रखना अपनी वो मोहब्बत पर,
मेरा हर लम्हा तेरे दर्द को सह जायेगा,

बनाले चाहे एक खुबसुरत महल रेतोका,
समुन्दरी लहेर आयेगी वो ढह जायेगा,

इश्क पे पाबंधी लगानेवालो अब जानलो,
यह मेरा प्यार उसीका हो के रह जायेगा,

लोग तो आज भी रश्क से कहते रहते है,
इश्क में पागल ‘नीर’, अब यह जायेगा ।

नीशीत जोशी ‘नीर’ 24.03.12

THANX FOR WISHES ON BIRTHDAY


आज के दिन को बहार बना दिया,
प्यार दे दिन को तौहार बना दिया,

कुछ न थे हम तो, पडे थे राह पर,
मेरे रास्ते को खुश्बुदार बना दिया,

दुआए असर भी करती है,ये जाना,
नबी के लिये दिदार-ए-यार बना दिया,

आप सभी की दुआ,मोहब्बत ने तो,
कुछ नफरत को भी प्यार बना दिया,

न भुलना मुजे मोहब्बत के दस्तुर में,
आज सभीने नीरको ताबेदार बना दिया ।

नीशीत जोशी ‘नीर’ 21.03.12

प्यार में अक्सर


प्यार में अक्सर ईन्तजार करना पडता है,
जीन्दा रह के कतरा कतरा मरना पडता है,

लोगो की भीड में कहीं फिर खो न जाये वो,
हर नग्मे को उनके नाम से पढना पडता है,

प्यार के आसार में नींद आती नही रातभर,
सपनोको भी बाहर ईन्तजार सहना पडता है,

बेदर्द जमाना न जाने दर्द-ए-इश्क कि दास्तां,
छुपाके गम को सबके सामने हसना पडता है,

कोई तो बनाके रखता है प्यार में ताजमहल,
जहांवाले को वो तौफा संभाल रखना पडता है,

अपनो के मुश्कुराने से महक उठती है फिझा,
प्यार में आंखो को अश्को से सजना पडता है,

बहोत कठीन है डगर इस मोहब्बतके राह की,
इस राह पे चलनेवालो को ‘नीर’ जलना पडता है ।

नीशीत जोशी ‘नीर’ 20.03.12

सपने

सपने भी कैसे कैसे आते है,
कभी रुलाते कभी हसाते है,

माना सपने नही होते अपने,
सपने तो अपनो को सजाते है,

दफन है यादे दिलके कुचे में,
वही यादे सपने बन जाते है,

नीद नही?जागके सपने देखो,
सपने ही सही राह बताते है,

एक बार नबी के सपने देखलो,
देख फिर सपने कैसे मुश्कुराते है ।

नीशीत जोशी ‘नीर’

सपनो में


आज उनसे एक मुलाकात हो गयी,
सपनो में उनके पुरी रात खो गयी,

चैन की नीदसे सोये हुए थे हम तो,
मेरे सपनेको दिदार देके सजो गयी,

रातभर करते रहे मोहब्बत की बाते,
सर रख कर मेरे कंधे पे वो सो गयी,

खलेल न पडे नींद में धडकन सुनके,
खुदबखुद धडकती सांसे धीमी हो गयी,

एक बचा था दिल खुदका कहने जैसा,
जताके प्यार सपनोमे ‘नीर’को भीगो गयी ।

नीशीत जोशी ‘नीर’ 19.03.12

सीख लिया


समुंन्दर को देखके डरना सीख लिया,
लहेरो को हाथो में भरना सीख लिया,

ना मीली थी तामील हमको उडान की,
होसलो से ही हमने उडना सीख लिया,

कमजोर था ये दिल खेल में थक गया,
उसे भी अब तन्हा रखना सीख लिया,

लाये बिसात बीछा दी उसने एक बाझी,
उनकी चालो पे चाल चलना सीख लिया,

जमी पर थे ख्वाईश रख ली आसमां की,
उस मुराद को बरबाद करना सीख लिया,

जज्बात जता के घावो को नासूर बनाया,
खयालोमें खो कर दर्द सहना सीख लिया,

अब तुम कभी न आना मेरी कब्र पे ‘नीर’,
आंसू बहानेसे बहेतर तो मरना सीख लिया ।

नीशीत जोशी ‘नीर’ 18.03.12