મુક્તક/ मुक्तक

तुटके भी फुल खुद फितरत नही छोडता,
इत्र बन कर, जमाने में महकने लगता है ॥
हमे तो इश्क करने का भी हक नही ‘नीर’,
सुन कर हमे, आसमां भी बरसने लगता है ॥
नीशीत जोशी ‘नीर’ 15.03.12

મુક્તક/ मुक्तक

बेबसी बयां कर के क्यों सता रहे हो ?
ईजहार-ए-मोहब्बत क्या जता रहे हो ?
गुजर दी इन्तजार में हिज्र कि रात भी,
अब खयालो में ‘नीर’ क्या बता रहे हो ?

नीशीत जोशी ‘नीर’

મુક્તક/ मुक्तक

एक नजर ही काफी है कमाल के लिये,
गीरफ्त हो जाये दिल मीसाल के लिये,
सुबहशाम फिर जीक्र उसीका रहे लब पे,
खुद ही फिर वजह बने इस बेहाल के लिये….

नीशीत जोशी 26.12.11

મુક્તક/ मुक्तक

कहां जाए किसे कहे मन की सब बाते,
तु होती तो तेरे पल्लुमे छुप कर रो लेता….
मेरे खयालो मे से नही कभी जाओगी,
गर चलता बस,रब से भी वापस ले लेता….

नीशीत जोशी

મુક્તક/ मुक्तक

रब ने तुजे नवाजा है दे के खुबसुरती,
गुमान ना करना कही दाग ना लग जाये,
महोब्बत करते है बीन सोचे समजे,
नुमाइश ना करना कही धाव ना लग जाये….

મુક્તક/ मुक्तक

गुंजता है वह गीत आजभी कानो में मेरे,
जंकार रणकती है आजभी कानो मे मेरे,
तेरे इन्तजार मे हुए है ऐसे तो दिवाना,
दिवानगी छलकती है आजभी गानो मे मेरे….

શું શું થયેલુ ?

તુજ સંગ સબંધ બાંધ્યો ત્યારે શું શું થયેલુ ?
લાગણીઓ પ્રસરી હતી ત્યારે શું શું થયેલુ ?

જવાબ આપજે તુ મને એ બધી વાતોનો,
સ્વાસેસ્વાસે નામ આવ્યુ ત્યારે શું શું થયેલુ ?

નીશીત જોશી

ऐसा रंगना मुझे

लैटे जो अंबरमे ,हो गया उसका नीला रंग,

आके मेरे चीतवन मे, भर देना वो रंग,

ऐसा रंगना मुझे न लगे दुजा रंग, और

न रहु मेरे रंगमे, बस रम जाउं तेरे रंग ।


नीशीत जोशी